हिंदी नहीं तो ............
तन में हिंदी, मन में हिंदी, जन-जन में है हिंदी।। (full 2) तुम में हिंदी, मुझ में हिंदी, हम सब में है हिंदी।। राष्ट्रप्रेम की बात हो या फिर,(2) मन की बात हो चाहे। हिंदी में सब बोलें समझें, हिंदी में ही सोचे और गाए।।(after, 2) हिंदी से प्रेम करो सब, पराया मत इसको जानो। हिंदी ही मां है सबकी, महानता इसकी पहचानो।। जब बोलें तब हिंदी बोलें, लिखें-पढें सब हिंदी। (full 2) खूब हुई गुलामी गिटपिट की, बस अब केवल हिंदी। पहचान मिले हिंदी को उसकी, कर लें सब संकल्प। हिंदी है संपूर्ण स्वयं में, नहीं है उसका कोई विकल्प।। (after, 2) कहे श्वेता यह सब जन को, सब करो इसपर विचार। हिंदी को देना है स्थान वही जो, है उसका अधिकार।।(full 2) जय हिंदी जय भारत